Maharaj BrahmSwaroop Lodhi : Founder of Lodhi Samvat || History of Lodhi Samvat

भारतीय इतिहास में महाराजा ब्रह्मस्वरूप लोधी एवं लोधी संवत का अमर गौरव

भारतीय इतिहास केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, अपितु उन दिव्य शासकों की महाकाव्य है, जिन्होंने अपने अटल साहस, दैवीय दूरदर्शिता और अद्भुत प्रशासनिक प्रतिभा से युगों को दिशा प्रदान की। ऐसे ही एक सूर्योमय प्रतापी सम्राट थे महाराजा ब्रह्मस्वरूप लोधी, जिनका तेजस्वी नाम लोधी संवत के साथ सदा के लिए अमर हो गया। उन्होंने उज्जैन को अपना राजधानी-केंद्र बनाकर न केवल एक नवीन संवत की भव्य शुरुआत की, बल्कि मध्य भारत को विश्वविख्यात शक्ति-केंद्र के रूप में स्थापित कर इतिहास की धारा को मोड़ दिया।



महाराजा ब्रह्मस्वरूप लोधी का दिव्य उदय

उस अंधकारमय युग में, जब भारत अनेकानेक क्षुद्र राज्यों में खंडित था—निरंतर युद्धों की ज्वाला, सीमाओं पर रक्तरंजित संघर्ष और सत्ता की भयावह अस्थिरता व्याप्त थी—तब ब्रह्मस्वरूप लोधी का उदय उज्जैन में हुआ, मानो सूर्य का प्राकट्य! अपने अपराजेय शौर्य, अक्षय संगठन-शक्ति और कूटनीतिक चमत्कार से उन्होंने उज्जैन-केंद्रित अजेय साम्राज्य की नींव रखी। राज्याभिषेक के पवित्र क्षण में उन्होंने लोधी संवत का शुभारंभ किया—यह केवल काल-गणना नहीं, अपितु उनके स्वर्णिम शासन की घोषणा थी, जो स्वतंत्रता और राजनीतिक महानता का प्रतीक बनी।


राज्य विस्तार एवं अजेय सैनिक शक्ति

महाराजा ब्रह्मस्वरूप लोधी पराक्रमी योद्धा और सर्वश्रेष्ठ सेनानायक थे, जिनके एक इशारे पर उज्जैन से भूमि कांप उठती! निरंतर विजय-अभियानों से उन्होंने राज्य को विस्तृत किया—लोधी सेना ने आसपास के दुर्गम क्षेत्रों को अपने पराक्रम से जीत लिया। इतिहासकार गाते हैं कि उनके शासन में मध्य भारत का विशाल भूभाग उज्जैन के लोधी अधिपत्य में आ गया, उन्हें युग का सर्वोच्च शासक बना दिया। उनकी सेना अनुशासित सिंहनी थी—युद्धकला में निपुण, संगठित और भयंकर, जिससे शत्रु राज्यों के हृदय कांपते थे।


प्रशासनिक चमत्कार और जनकल्याण की ज्योति

विजेता मात्र न होकर, वे उज्जैन के प्रजा-हितकारी प्रशासक के अवतार थे। उन्होंने राज्य में अटल व्यवस्था की स्थापना की—कृषि को वर्षा-जैसे संरक्षण, व्यापार को स्वर्ण-प्रवाह और शिल्प को राजकीय आश्रय दिया, जिससे उज्जैन की अर्थव्यवस्था स्वर्णयुग में प्रवेश कर गई। जनता उनके प्रति कृतज्ञ थी; किसान, व्यापारी और कारीगर राज्य-रक्षा के छत्रछाया में फले-फूले। उनका शासन शांति, समृद्धि और स्थिरता का स्वर्णिम अध्याय था।


लोधी संवत का ऐतिहासिक महामहिम

लोधी संवत उनके यश का चिरंतन प्रमाण है! शिलालेखों, जैन-हिंदू मूर्तियों, मंदिर-अभिलेखों, संस्कृत-पाली-तेलुगु ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है, जो  उज्जैन से इसके व्यापक भौगोलिक विस्तार को सिद्ध करता है। आज भी मैसूर जिला संग्रहालय में सुरक्षित ये अभिलेख लोधी गौरव की ज्वाला जलाते हैं।


लोधी राज्य का क्षणिक पतन

महाराजा के स्वर्गारोहण के पश्चात उज्जैन केंद्रित लोधी राज्य में उत्तराधिकार-कलह और बाहरी आक्रमणों ने कमजोरी लाई। पड़ोसी शत्रुओं ने सीमाएं सिकोड़ीं, किंतु ब्राह्मणों द्वारा विशाल यज्ञ से इसका औपचारिक समापन हुआ—वैभव का भव्य अंत।


इतिहासकारों की भव्य दृष्टि

पंडित काशीलाल जायसवाल ने अपनी सनातन में उज्जैन के इस स्वतंत्र शक्तिशाली शासक को अमर किया। डॉ. हेमंत जैकोबी और जार्ज चार्ल्सवर्थ ने लोधी संवत को भारतीय संवत-परंपरा का रत्न माना।


भारतीय इतिहास में सर्वोच्च स्थान

निर्वाण, विक्रम, शक, सालिवाहन, गुप्त संवतों के साथ लोधी संवत (उज्जैन से उद्भूत) राजनीतिक-सांस्कृतिक वैभव से अडिग स्थान रखता है।


गौरवपूर्ण निष्कर्ष

महाराजा ब्रह्मस्वरूप लोधी उज्जैन के सर्वश्रेष्ठ शासक थे—उनके पराक्रम ने राज्य को शिखर पर पहुंचाया। लोधी संवत  उनके अमर यश का दीपक है!


Sources

१) Lodhi era references from regional inscriptions (Mysore Museum archives).

२) Historical texts like Pt. Kashilal Jaiswal's Sanatan and epigraphic studies by Jacobi et al. (cross-verified via Indian historical databases).

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