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Maharaj Hirdeshah Lodhi || राजा हृदय शाह लोधी

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  Maharaja HirdeShah Lodhi     [1] (also known as   Raja Hirdeshah   Lodhi   or     Raja Hirdeshah Judeo or  राजा हृदय शाह लोधी  ), was a   Lodhi Rajput   Ruler in 19th Century of   Bundelkhand's   Hirapur Princely State in Madhya Pradesh. Raja Hirdeshah   Lodhi   ruled the northern region of present-day Narsinghpur. [2]   He led an armed revolt against the British East India Company in 1842. Biased historians gave the credit of waging the first war against the British to  Mangal Pandey , whereas before him King Hirdeshah of Bundelkhand area Hirapur had kept the British watered to such an extent that even the throne of  Queen Victoria  sitting in London was shaken. Revolt of 1842 Raja Hirdeshah ( also known as the " Narmada Tiger" ) was the main hero of the Bundelkhand  Revolt of 1842 . Although this rebellion was suppressed by the Company government, Hirdeshah again played a sacrifi...

Bakhwala Zamindar Gharana || ग्राम इटौरा बुजुर्ग का महालोधी बखवाला जमींदार घराना

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इटौरा बुजुर्ग ज़मींदारी, जिसे ऐतिहासिक और स्थानीय स्तर पर बखवाला घराना के नाम से जाना जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के महोबा जिले (कुलपहाड़ तहसील) में स्थित एक पूर्व ओर ऐतिहासिक ज़मींदारी थी। इस ज़मींदारी के शासक लोधी क्षत्रिय (राजपूत) समुदाय की 'महालोधी' शाखा से संबंधित थे। मध्यकालीन भारत से लेकर ब्रिटिश काल तक, इस घराने ने बुंदेलखंड के राजनीतिक और सैन्य इतिहास, विशेषकर मुग़ल विरोधी अभियानों और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ♦इतिहास :- उत्पत्ति और विस्थापन बखवाला घराने के पूर्वज मूल रूप से बुंदेलखंड की मुस्करा ज़मींदारी से संबंधित थे। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, मुस्करा ज़मींदारी की स्थापना चंदेल राजवंश के शासनकाल के दौरान हुई थी। समय के साथ भौगोलिक और राजनीतिक परिवर्तनों के कारण, इस महालोधी क्षत्रिय परिवार का एक हिस्सा मुस्करा से विस्थापित होकर गाजीपुर नामक स्थान पर बस गया। कुछ समय पश्चात्, इस परिवार के तत्कालीन मुखिया लंबरदार इंद्रजीत सिंह महालोधी ने गाजीपुर से निकलकर एक नई ज़मींदारी की स्थापना की, जिसे "इटौरा" नाम दिया गया। वर्तमान ...

History of MahaRaja Hirdeshah Lodhi || महाराजा हिरदेशाह लोधी जी का इतिहास || 1842-1857 Revolt History

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अंग्रेजों के खिलाफ पहली लड़ाई छेड़ने का श्रेय पक्षपाती इतिहासकारों ने मंगल पांडे को दिया जबकि उनके पहले बुंदेलखंड की हीरापुर रियासत के महाराजा हिरदेशाह जूदेव लोधी ने अंग्रेजों को इस कदर पानी पिला रखा था कि लंदन में बैठी महारानी विक्टोरिया का सिंहासन भी डोल गया था।     ब्रिटिश हुकूमत के विद्रोही हीरापुर रियासत के महाराज हिरदेशाह लोधी महाराजा हिरदेशाह लोधी बुंदेलखंड विद्रोह -1842 के प्रमुख नायक थे। यद्यपि यह विद्रोह कंपनी सरकार द्वारा दबा दिया गया था , लेकिन 1857 के समर में महाराजा हिरदेशाह लोधी ने पुन : बलिदानी भूमिका निभाई थी , जिसमें इनका पूरा परिवार शहीद हो गया था। अंग्रेजों के विरुद्ध 1842 के विद्रोह एवं 1857 के समर में महाराजा हिरदेशाह लोधी का साथ उनकी बिरादरी के अन्य लोधी राजाओं , तालुकेदारों , जागीरदारों व प्रजाजनों तथा गोंड़ राजाओं और उनकी प्रजा ने दिया था। ब्रिटिश दस्तावेज महाराजा हिरदेशाह लोधी को 1842 के विद्रोह एवं 1857 के ग़दर का प्रमुख द...